विदेश से क्यों करते हैं एमबीबीएस?: 1 लाख छात्र, सरकारी सीट 3030; लो रैंक फिर 2 ऑप्शन- प्राइवेट कॉलेज को दें 1 करोड़ या बाहर जाएं:

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रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से राजस्थान सहित देश भर के हजारों छात्र यूक्रेन में फंस गए हैं। राजस्थान के करीब 300 छात्र अभी भी युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं। ये छात्र एमबीबीएस करने यूक्रेन गए थे। इसी बीच एक बड़ी बहस भी शुरू हो गई है कि भारतीय छात्र एमबीबीएस करने के लिए दूसरे देशों में क्यों जाते हैं? इसके पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए जाते हैं। न केवल यूक्रेन, नेपाल, बांग्लादेश, चीन, तुर्की, रूस और कई छोटे और बड़े अफ्रीकी देश, बड़ी संख्या में भारतीय छात्र चिकित्सा अध्ययन के लिए जाते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है, दैनिक भास्कर ने इस सवाल का जवाब चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों से जानने की कोशिश की।

इन कारणों से विदेशों में एमबीबीएस कर रहे हमारे छात्र
छात्रों के मुकाबले 5% सीट भी नहीं
नीट 2021 में 16 लाख 19 हजार छात्र शामिल हुए थे, लेकिन सीटें सिर्फ 77 हजार थीं। ऐसे में इन सीटों पर प्रवेश पाने से वंचित छात्रों को विदेश जाना पड़ता है। भारत के छात्र चीन, तुर्की, रूस और कई छोटे और बड़े अफ्रीकी देशों में पढ़ने जाते हैं। राज्य के सरकारी कॉलेजों में केवल 3030 मेडिकल सीटें हैं, जबकि नीट परीक्षा में 1 लाख से अधिक छात्र आते हैं। जो यहां के किसी सरकारी कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाते और प्राइवेट की फीस नहीं भर पाते, वे विदेश चले जाते हैं।

मेडिकल कॉलेज की फीस भी है एक बड़ी वजह

भारत में सरकारी कॉलेज की वार्षिक फीस 4-5 लाख है लेकिन सीटें सीमित हैं। निजी कॉलेजों में यह फीस सालाना 20 लाख से 30 लाख तक पहुंचती है। डिग्री पूरी होने तक फीस का आंकड़ा एक करोड़ के पार पहुंच जाता है। इसके उलट कई देशों में 4 लाख से 10 लाख सालाना के हिसाब से हॉस्टल में आसानी से एडमिशन मिल जाता है। 25 से 60 लाख में एमबीबीएस मिलता है। इनमें सबसे सस्ता शुल्क यूक्रेन में है। यहां सिर्फ 22 लाख रहने और खाने से पूरा कोर्स हो सकता है।

विदेश में एमबीबीएस करने के बाद देश में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा पास करना जरूरी है

विदेश में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को देश में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) में शामिल होना होता है। इसे पास करने के बाद ही भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है। 300 अंकों की इस परीक्षा को पास करने के लिए उन्हें 150 अंक लाने होंगे। पिछले 10 साल में राजस्थान के 13 हजार से ज्यादा छात्रों ने विदेश से एमबीबीएस किया है। इनमें से सिर्फ 2300 अभ्यर्थी ही फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा पास कर पाए

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