गांवों का स्वास्थ्य अब बनेगा मेडिकल छात्रों की पढ़ाई का हिस्सा, NMC का ड्रॉफ्ट तैयार:

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मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसको लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन की तरफ से ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा. खबरों के मुताबिक एफएपी का शुरुआती ड्रॉफ्ट यूजी मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के अध्यक्ष अरुणा वानिकर द्वारा तैयार किया गया है. इसके मुताबिक गोद लेने वाले परिवारों के पास छात्रों को नियमित अंतराल पर जाना होगा और हेल्थ की जांच करना होगा.

नई दिल्ली. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (MCC) फैमिली एडॉप्शन प्रोगाम (FAP) MBBS में लागू करने पर विचार कर रहा है. इस नियम के लागू होते ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को कम से कम पांच परिवारों को गोद लेना होगा और नियमित तौर पर उनके हेल्थ की जांच करने के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े सलाह देने होंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसको लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन की तरफ से ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा. खबरों के मुताबिक एफएपी का शुरुआती ड्रॉफ्ट यूजी मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के अध्यक्ष अरुणा वानिकर द्वारा तैयार किया गया है. इसके मुताबिक गोद लेने वाले परिवारों के पास छात्रों को नियमित अंतराल पर जाना होगा और हेल्थ की जांच करना होगा.

इस नियम के लागू होने से गोद लिए गए परिवारों की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी. इस दौरान छात्रों और कॉलेज द्वारा गांव का डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा. इससे एमबीबीएस के छात्रों में सहानुभूति के साथ डॉक्टरी के गुण भी विकसित होंगे.

इस दौरान एमबीबीएस छात्र असिस्टेंट प्रोफेसर और संबंधित गांव के आशा वर्कर की भी मदद लें सकेंगे. माना जा रहा है कि मेडिकल एजुकेशन रेगुलटरी इस प्रोग्राम को हर कॉलेज में लागू कर सकता है.

इधर, केंद्र सरकार पहले ही एमडी और एमएस कर रहे छात्रों के लिए तीन महीने की पोस्टिंग जिला अस्पताल में अनिवार्य कर दिया है. सरकार की तरफ से ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में हो सके.

आपको बता दें कि विश्व में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज भारत में हैं. यहां पर हर वर्ष 90000 MBBS स्टूडेंट ग्रेजुएट होते हैं. इसके अलावा, अन्य 733 आयुष मेडिकल कॉलेजों में हर साल 53,000 स्नातक पास आउट होते हैं

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