आयुर्वेदिक महाविद्यालय में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ठप

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नीट बुलेटिन। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी का खामियाजा आयुर्वेदिक महाविद्यालय के विद्यार्थियों, ओपीडी में आने और भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है। वजह यहां तैनात 26 में 20 चिकित्सक शिक्षकों को चुनावी व्यवस्था की जिम्मेदारी दे दी गई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ मास्टर ट्रेनर की जिम्मेदारी मिलने से चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान कार्य और स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। इससे परेशान प्राचार्य डॉ. आरके तिवारी ने डीएम को पत्र लिखकर मास्टर ट्रेनर के रूप में लगाई गई चिकित्सक शिक्षकों की ड्यूटी निरस्त करने की मांग की है।

शहर स्थित ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय में रोजाना सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी होती है। इसके अलावा परिसर में मरीजों का इलाज भी होता है। करीब 250 विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई कर रहें हैं। यहां चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान कार्य से लेकर ओपीडी और अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी प्राचार्य समेत 29 चिकित्सक शिक्षकों के कंधे पर है। इनमें तीन लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं। बचे 26 में 20 को लोकसभा चुनाव की ड्यूटी में लगा दिया गया है। खास बात यह भी है कि सेक्टर मजिस्ट्रेट के अलावा मास्टर ट्रेनर की दोहरी जिम्मेदारी मिलने से सभी व्यवस्था धड़ाम होती दिख रही हैं। 18 मार्च से बीएएमएस की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ-साथ चिकित्सकों की टेंशन बढ़ गई है। प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी के कारण हालात और भी बिगड़ने का दावा किया जा रहा है।
50 प्रतिशत ही रह गई ओपीडी
आयुर्वेदिक महाविद्यालय में प्रतिदिन पांच सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। वर्तमान की बात करें तो प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही के कारण जहां मरीजों की दिन पर दिन संख्या कम हो रही है वहीं ओपीडी भी उसी हिसाब से घट गई है। तीन दिन के आंकड़ों पर गौर करें तो ओपीडी 250 से 300 के बीच रही है। ऐसे में दूर दराज से पहुंचने वाले मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
वार्षिक निरीक्षण का सता रहा डर
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के अधीन केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद की टीम के वार्षिक निरीक्षण को लेकर भी आयुर्वेदिक महाविद्यालय प्रशासन का सिरदर्द बढ़ता जा रहा है। प्राचार्य डॉ. आरके तिवारी ने बताया कि अगले सत्र में प्रवेश हेतु मान्यता के लिए यह वार्षिक निरीक्षण किया जाना है। इसके साथ ही उनको कभी भी आयुष मंत्रालय के निर्देश पर गोपनीय रूप से देश के किसी भी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के लिए जाना पड़ सकता है।
फार्मेसी में दवाओं का कार्य भी बाधित
आयुर्वेदिक महाविद्यालय की फार्मेसी में बनने वाले दवाइयां 15 से अधिक जिलों के आयुर्वेद चिकित्सालयों में सप्लाई होती है। यह कार्य भी प्रभावित हो गया है। ना तो पर्याप्त मात्रा में दवाएं बन पा रहीं है न ही इनकी सप्लाई हो पा रही है। फार्मेसी का जिम्मा संभाले डॉ. नरेश कुमार की भी ड्यूटी लोकसभा चुनाव में लगा दी गई है।
चिकित्सा शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर और सेक्टर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी मिलने के बाद यहां सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। 18 मार्च से बीएएमएस की परीक्षाएं शुरू हैं। इसलिए मास्टर ट्रेनर के रूप में लगाई ड्यूटी निरस्त करने को डीएम को पत्र लिखा है ताकि व्यवस्था पटरी पर आ सकें। – डॉ. आरके तिवारी, प्राचार्य, आयुर्वेदिक महाविद्यालय
लोकसभा चुनाव को लेकर लगाई गई चिकित्सक शिक्षकों की ड्यूटी से संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देंगे। प्राचार्य की ओर से इस संबंध में अगर कोई पत्र मिलता है तो तत्काल ही समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। – वैभव श्रीवास्तव, डीएम

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