ऐसे ही नहीं डैंटल डाक्टर बन जाएंगे एम.बी.बी.एस., देना होगा ‘नीट’

NEET Bulletin: जालंधर(सोमनाथ): ब्रिज कोर्स के माध्यम से MBBS डाक्टर बनने का सपना पाले Dental डाक्टरों और नर्सों के लिए इस पाठ्यक्रम में दाखिला इतना आसान नहीं होगा जैसा वे आस लगाए बैठे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy )-2019 के प्रारूप अनुसार मैडीकल एजुकेशन में काफी बदलाव लाए जाने की सिफारिशें की गई हैं। इनमें से एक सिफारिश डैंटल डाक्टर्स और नर्सों के लिए MBBS में लेटरल एंट्री की है। प्रारूप अनुसार सभी मैडीकल साइंस ग्रैजुएट के लिए 1 या 2 साल की पढ़ाई एक जैसी रखने की सिफारिश की गई है। उसके बाद ये स्टूडैंट्स MBBS, BDS., Nursing और अन्य विषय विशेषज्ञ की पढ़ाई कर सकेंगे।

लेटरल एंट्री का अर्थ यह नहीं कि MBBS में सीधे दाखिला

नारायण हैल्थ के चेयरमैन डा. देवी शैट्टी, जिन्होंने मैडीकल एजुकेशन का प्रारूप तैयार करने में खासी भूमिका निभाई है, ने स्पष्ट किया कि लेटरल एंट्री का मतलब प्रवेश परीक्षा से छूट नहीं है। उन्होंने कहा कि MBBS Course में लेटरल एंट्री लेने के इच्छुक डैंटिस्ट और नर्सों को ‘NEET’ पास करना होगा उसके बाद ही MBBS. कोर्स की 3 साल की बाकी की पढ़ाई कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि डैंटल काऊंसिल ऑफ इंडिया ने Medical Council of India को बी.डी.एस. पास करने वाले डाक्टरों के लिए MBBS. का 3 साल का ब्रिज कोर्स करवाने का प्रस्ताव भेजा है। MEDICAL COUNCIL OF INDIA ने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार के बाद इस प्रस्ताव को नीति आयोग के पास भेज दिया है। यह प्रस्ताव देशभर में डाक्टरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बता दें कि डाक्टरों की कमी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्तावित नैशनल मैडीकल कमीशन (NMC – National Medical Comission.) विधेयक में भी आयुष के डाक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव रखा था।

 

 

 

 

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