अंग्रेजी के अलावा भोजपुरी और अवधी भी पढ़ेंगे एमबीबीएस के छात्र

अस्पताल का डॉक्टर अगर भोजपुरी या बुंदेलखंडी भाषा बोले तो चौंकिएगा नहीं, इसका मतलब यह नहीं कि वह गांव क्षेत्र का है या फिर कम पढ़ा लिखा है। मरीज के साथ उसकी क्षेत्रीय भाषा में बात करके डॉक्टर उसे घरेलू माहौल देने की कोशिश करेगा। इसके लिए एमबीबीएस के छात्रों को अब क्षेत्रीय भाषाएं भी सिखाई जाएंगी ताकि वह मरीजों से घुल-मिल सके।

दो वैकल्पिक विषय अनिवार्य
एमबीबीएस के छात्रों को अब दो वैकल्पिक विषय भी पढऩे होंगे। इसके लिए वह संगीत, कंप्यूटर, सोशल साइंसेस, फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी, कॉमर्स, इकोनामिक्स आदि विषयों में कोई दो का चयन कर सकते हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस सत्र से नया कोर्स लागू किया है। जिसके लिए मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदान, डॉ. प्रेम सिंह, डॉ. धनंजय चौधरी को लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पहले चरण का प्रशिक्षण भी दिया गया।

नए कोर्स में कम होगी थ्योरी
इसी सत्र से बदले हुए पाठ्यक्रम के बारे में बताया गया कि अब थ्योरी को कम कर दिया गया है, इसकी जगह प्रैक्टिकल का हिस्सा बढ़ाया जाएगा, जिससे मेडिकल छात्रों की कुशलता में इजाफा होगा। वैकल्पिक विषय छात्रों में नयी संभावनाएं विकसित करेंगे जो उनके लिए आगे मददगार साबित होंगे। छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों को नए कोर्स के हिसाब से शिक्षण की तैयारी पूरी करने को कहा गया है।

सिखाई जाएगी क्षेत्रीय भाषा
एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को अंगे्रजी के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाएं भी सिखाई जाएंगी। जिसमें अवधी, भोजपुरी, बुंदेलखंडी सहित कई भाषाओं का समावेश रहेगा। छात्र जो चाहे वह भाषा सीख सकते हैं। इसका मकसद यह होगा कि मरीज जिस क्षेत्रीय भाषा में बात करता है, अगर डॉक्टर भी उससे उसी भाषा में बात करेंगे तो वे एक दूसरे की बात को ढंग से समझ पाएंगे और मरीज को अपनत्व का एहसास होगा।

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